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बढ़ती गर्मी के दृष्टिगत जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जारी किए आवश्यक दिशा-निर्देश

मंडी, 22 मई। जिला दंडाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष अपूर्व देवगन ने वर्तमान मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए, आम जनता की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशानिर्देश जारी किए हैं।

अपूर्व देवगन ने कहा कि मौजूदा भीषण गर्मी के बीच मंडी जिले के विभिन्न हिस्सों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में काफी वृद्धि हुई है। सुंदरनगर में तापमान 39.2 डिग्री सेल्सियस और मंडी में 38.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जबकि बल्ह घाटी, सरकाघाट, धर्मपुर और आसपास के निचले पहाड़ी क्षेत्रों में भी अपेक्षाकृत अधिक तापमान देखा जा रहा है। इसके अलावा, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने आगामी सप्ताहों में सामान्य से कम वर्षा का पूर्वानुमान लगाया है। आईएमडी ने यह भी पूर्वानुमान लगाया है कि मई, 2026 के दौरान मध्य पहाड़ी और निचले पहाड़ी क्षेत्रों में लू के दिनों की संख्या दीर्घकालिक औसत की तुलना में सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि इन विपरीत मौसम परिस्थितियों के दृष्टिगत जिला प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने जलशक्ति विभाग को जल आपूर्ति एवं स्वच्छता के दृष्टिगत सभी आवासीय क्षेत्रों में पर्याप्त और निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सार्वजनिक जल स्रोतों, भंडारण टैंकों, हैंडपंपों और जल आपूर्ति योजनाओं की नियमित सफाई, रखरखाव और क्लोरीनीकरण सुनिश्चित किया जाए। जल की कमी वाले और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने संबंधित विभाग को पेयजल आपूर्ति के लिए उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने और जल संकट से संबंधित किसी भी समस्या का तुरंत समाधान करने के निर्देश दिए हैं। सभी सार्वजनिक स्थानों और आस-पास की बस्तियों में पेयजल की सुविधा सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक पेयजल सुविधाएं उपलब्ध करवाने के दृष्टिगत सार्वजनिक स्थानों, कार्यालयों, अस्पतालों, बस स्टैंडों, बाजारों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में स्थापित ठंडे पानी के फिल्टर/कूलर और पेयजल केंद्र तुरंत चालू किए जाएं। संबंधित विभाग इन सुविधाओं का नियमित निरीक्षण, सफाई और रखरखाव भी सुनिश्चित करेंगे।

जिला दंडाधिकारी ने सभी शिक्षण संस्थानों को विद्यार्थियों को अत्यधिक गर्मी से बचाने के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने के निर्देश दिए हैं। विद्यालयों और महाविद्यालयों में स्वच्छ पेयजल, उचित वेंटिलेशन और छायादार स्थान सुनिश्चित करने, दोपहर के समय बाहरी गतिविधियों को यथासंभव कम करने, प्राथमिक चिकित्सा, सफाई सुविधाएं और ओआरएस इत्यादि की आसानी से उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा है।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को गर्मी से संबंधित बीमारियों के प्रबंधन के लिए समय रहते अस्पताल की तैयारियों संबंधी उपाय करने को कहा है। लू से संबंधित आपात स्थितियों के लिए आपातकालीन इकाइयाँ और एम्बुलेंस सेवाएं पूरी तरह से चालू रखने, रोगी देखभाल क्षेत्रों में पंखे, कूलर और एयर कंडीशनिंग (जहाँ उपलब्ध हो) सहित कार्यात्मक शीतलन व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। बर्फ के पैकेट, शीतलन उपकरण और आपातकालीन आपूर्ति की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश देते हुए उन्होंने लू लगने और थकावट के लक्षणों और प्राथमिक उपचार के बारे में सभी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रमुखता से जागरूकता संदेश व जानकारी प्रदर्शित करने को कहा। बुजुर्ग व्यक्तियों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बाहरी श्रमिकों सहित संवेदनशील समूहों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।

अपूर्व देवगन ने वनों को आग से बचाव के लिए वन विभाग व संबंधित हितधारकों को तैयारियां पूरी करने को कहा है। उन्होंने कहा कि सभी संवेदनशील वन क्षेत्रों और जोखिम ग्रस्त इलाकों में वन अग्नि प्रबंधन के लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करें। वन विभाग के फील्ड स्टाफ को सतर्क रहने और अग्निशमन सेवाओं तथा स्थानीय प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने आवश्यक अग्निशमन उपकरण, जल संसाधन और त्वरित प्रतिक्रिया दल तत्काल तैनाती के लिए तैयार रखने, वन अग्नि की घटनाओं को रोकने और ऐसी किसी भी घटना की तुरंत सूचना देने के लिए जन जागरूकता बढ़ाने को भी कहा है।

जिलादंडाधिकारी ने कहा कि कृषि व बागवानी विभाग फसलों और कृषि गतिविधियों पर लू के प्रभाव को कम करने के लिए आवश्यक उपाय सुनिश्चित करेंगे। किसानों को उचित सिंचाई पद्धतियों, जल संरक्षण और खड़ी फसलों को लू से बचाने के बारे में सलाह देने के साथ ही क्षेत्र के कर्मचारियों के माध्यम से किसानों और कृषि श्रमिकों को लू से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करें। संवेदनशील एवं जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में समय पर प्रतिक्रिया के लिए पर्याप्त समन्वय बनाए रखें।

उन्होंने पशुपालन विभाग को निर्देश दिए कि पशुधन और आवारा पशुओं के लिए पर्याप्त पेयजल और छायादार आश्रय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। पशु चिकित्सा संस्थान और पशुपालन विभाग पशुओं में गर्मी से होने वाली बीमारियों के प्रति सतर्क रहें और आवश्यक सहायता एवं उपचार प्रदान करना सुनिश्चित करें।

उन्होंने संबंधित विभागों और स्थानीय निकायों को सोशल मीडिया, स्थानीय केबल नेटवर्क और फील्ड कैंप के माध्यम से लू से सुरक्षा संबंधी सलाह प्रसारित करने को भी कहा। साथ ही सभी नागरिकों को सलाह दी है कि वे लू के चरम समय के दौरान सीधी धूप में अनावश्यक रूप से निकलने से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और लू से संबंधित बीमारियों से बचाव के लिए पर्याप्त सावधानी बरतें।