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किसानों के लिए पाँच दिवसीय संस्थागत कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

मंडी, 31 मार्च। डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालयनौणी के उप-परिसरऔद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालयथुनाग (गोहरगुडाहरी)मंडी द्वारा कृषि वानिकी (एग्रोफॉरेस्ट्री) विषय पर पाँच दिवसीय संस्थागत कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय कृषि विकास योजनाकैफेटेरिया के कृषि वानिकी घटक के अंतर्गत आयोजित किया गयाजो राज्यों को अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कृषि गतिविधियों के चयन का अवसर प्रदान करता है।

महाविद्यालय की सहायक प्रोफेसर (बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) डॉ. नेहा ठाकुर ने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को कृषि वानिकी की आधुनिक तकनीकोंगुणवत्तायुक्त पौध सामग्री तथा आय बढ़ाने के टिकाऊ उपायों से अवगत करवाना था। प्रशिक्षण के दौरान कृषि वानिकी से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान आयोजित किए गएजिनमें आरकेवीवाईकैफेटेरिया योजनाकृषि वानिकी की अवधारणा, हिमालयी क्षेत्रों में इसकी उपयोगिताविभिन्न प्रणालियाँ एवं औषधीय पौधों पर आधारित मॉडल शामिल रहे। साथ ही कृषि विभाग की योजनाएंसब्जियों एवं विदेशी सब्जियों की भूमिकाजलवायु परिवर्तन तथा बहुउद्देशीय वृक्ष प्रजातियों के चयन पर भी जानकारी दी गई।

उन्होंने बताया कि प्रबंधन संबंधी सत्रों में मृदा स्वास्थ्यछंटाई एवं कैनोपी प्रबंधनकीट एवं रोग नियंत्रण, बाजार से जुड़ाव एवं उद्यमिता के अवसरों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान मूल्य संवर्द्धनप्रसंस्करणभंडारणफ्लोरीकल्चर एवं पशुपालन प्रबंधन पर जानकारी के साथ ही किसानों को हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।

इसके अतिरिक्त किसानों को गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्रीउपयुक्त कृषि वानिकी प्रणालियों तथा फील्ड विजिट एवं प्रदर्शन के माध्यम से व्यावहारिक अनुभव भी दिया गया। इस प्रशिक्षण से किसानों के कौशल में वृद्धि के साथ आय बढ़ाने एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलने की संभावना है।