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एड्स सुरक्षा अभियान से लोगों को जोड़ने और 95-95-99 लक्ष्यों को हासिल करने पर जिला-स्तरीय बैठक आयोजित, उपायुक्त ने की अध्यक्षता

*मंडी, 11 जून।* ‘मोबिलाइजेशन फ़ॉर एड्स सुरक्षा’ (एमएएस) पहल के तहत जिला-स्तरीय समीक्षा और योजना बैठक उपायुक्त अपूर्व देवगन की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित की गई। बैठक में जिला एड्स कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अरिंदम राय, जिला कार्यक्रम अधिकारी (एनसीडी) डॉ. पवनेश के अतिरिक्त एचआईवी/एड्स की रोकथाम, देखभाल और इलाज की गतिविधियों को लागू करने और उनकी निगरानी के लिए गठित ज़िला-स्तरीय समिति के अन्य सदस्य शामिल हुए।

उपायुक्त ने एचआईवी से निपटने के राष्ट्रीय और वैश्विक लक्ष्यों 95-95-99 को हासिल करने के लिए एड्स सुरक्षा अभियान के तहत ज़िला-स्तरीय प्रयासों को मज़बूत करने पर बल दिया। उन्होंने पूरे ज़िले में जागरूकता, रोकथाम, जाँच, इलाज और वायरल सप्रेशन (वायरस के स्तर को कम करने) के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने के भी निर्देश दिए।

उन्होंने बताया कि 95-95-99 लक्ष्यों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एचआईवी के साथ जीवन जी रहे सभी लोगों में से 95 प्रतिशत को अपनी एचआईवी स्थिति के बारे में पता हो। एचआईवी से पीड़ित पाए गए 95 प्रतिशत लोगों को लगातार एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) मिले और एआरटी ले रहे 99 प्रतिशत लोगों में वायरल सप्रेशन हो और वे इलाज का सही ढंग से पालन करें।

बैठक में इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए विभिन्न उपायों पर भी चर्चा की गई। उपायुक्त ने समुदाय, शिक्षण संस्थानों, कार्यस्थलों और गाँवों के स्तर पर एचआईवी जागरूकता अभियानों को तेज़ करने को कहा। साथ ही स्वास्थ्य केंद्रों, आउटरीच कैंप और लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से एचआईवी स्क्रीनिंग और जाँच सेवाओं के विस्तार पर बल दिया। इसके अतिरिक्त इलाज समय पर शुरू हो, यह सुनिश्चित करने के लिए जाँच केंद्रों और एरटी केंद्रों के बीच रेफरल सिस्टम को मज़बूत करने के भी निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि उपचार में रुकावट और फ़ॉलो-अप छूटने की समस्या को कम करने के लिए एचआईवी पॉजिटिव लोगों का नियमित फ़ॉलो-अप करें। इलाज का सही ढंग से पालन करने और भेदभाव व सामाजिक विभेद को कम करने के लिए बेहतर काउंसलिंग सेवाएँ भी सुनिश्चित करें। इसके लिए पंचायतीराज संस्थाओं, समुदाय-आधारित संगठनों, युवा समूहों और नागरिक समाज संगठनों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए।

समिति ने राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिलों के वर्गीकरण की भी समीक्षा की जिन्हें संघर्षी, सक्षम, सुरक्षित और सुरक्षित प्लस जिले के रूप में वर्गीकृत किया गया है। उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे कार्यक्रम के प्रदर्शन को बेहतर बनाने और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के ढांचे के तहत उपलब्धि की उच्च श्रेणियों की ओर बढ़ने के लिए आपसी तालमेल के साथ काम करें।