
चंडीगढ़, 23 फरवरी – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के मामले में कहा कि हरियाणा सरकार के विभागों की जागरूकता से यह मामला सामने आया और इस पर सरकार ने तत्काल बैंक को डि-एमपैनल कर दिया। बैंक द्वारा जो स्टेटमेंट उपलब्ध कराए गए, वे-विभागीय स्टेटमेंट से मेल नहीं खाते थे। राज्य सरकार गंभीरता से इस मामले की जांच करवा रही है। सरकार ने ये मामला राज्य के एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंपा है। इसके अलावा, इस पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का भी गठन किया जायगा।
मुख्यमंत्री ने इस विषय पर सोमवार को हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन में और पत्रकारों से बातचीत करते हुए जानकारी दी कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने सेबी को पत्र लिखा, जिसमें बैंक के कर्मचारियों द्वारा गड़बड़ किए जाने की बात कही। इस मामले में बैंक ने भी अपने कर्मचारियों पर कार्रवाई शुरू कर रखी है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के लेनदेन में मिली अनियमितताओं के सम्बंध में एफआईआर दर्ज हो गयी है। बैंक ने इस सम्बंध में 21 फरवरी को पत्र लिखा था, जबकि जैसे ही यह मामला राज्य सरकार के संज्ञान में आया तो सरकार ने पहले ही 18 फरवरी को बैंक को डि-एमपैनल करते हुए ब्याज सहित पैसा राष्ट्रीय बैंक में ट्रांसफर करने के लिए कह दिया था, पैसा पूरा सुरक्षित है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक एक पैसा वापिस लाया जाएगा, इस सम्बंध में बैंक के कर्मचारी ने कोई हरकत की है या फिर किसी और ने, इन पहलुओं की जांच की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रो- एक्टिव होकर इस मामले को पकड़ा है क्योंकि राज्य सरकार हर विषय के ऊपर बहुत गंभीरता से ध्यान देती है। उन्होंने कहा कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पास हरियाणा सरकार की जो धनराशि जमा थी, उसका एक बड़ा भाग सावधि जमा यानी कि एफ.डी. के रूप में निवेशित था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बैंकों में विभागों द्वारा पैसा रखने की प्रथा आज से नहीं, बल्कि पहले से ही है। कांग्रेस के समय में भी विभागों का पैसा बैंकों में रहता था। बैंकों के पैनल बनते रहते है, और नए बैंक जुड़ते रहते है। इस मामले की गहनता से जांच की जाएगी और किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।