
चण्डीगढ, 16 दिसंबर – गुजरात व महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि भारत के भविष्य को उन्नति की ओर ले जाने के लिए हमें केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि बच्चों का शिक्षा के साथ-साथ चारित्रिक, बौद्धिक और शारीरिक विकास करना होगा जिससे वे संस्कारवान बन सकें। उन्होंने आह्वान किया कि यदि हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखना है, तो हमें पुनः अपनी वैदिक संस्कृति और प्राकृतिक खेती की ओर लौटना होगा।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत कैथल के आर्य सीनियर सेकेंडरी विद्यापीठ बस्तली में स्वास्थ्य एवं प्राकृतिक खेती की चुनौतियां विषय पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। उन्होने स्कूल में नवनिर्मित सभा स्थल का भी उद्घाटन किया।
आचार्य देवव्रत ने कहा कि आज समाज के सामने बड़ी चुनौती यह है कि युवा पीढ़ी में नशे की लत बढ़ रही है। नशा, अंधविश्वास और रासायनिक खेती आज देश व समाज के भविष्य के लिए एक गहरी चिंता का विषय है।
राज्यपाल ने कहा कि आज हमें प्राकृतिक खेती की ओर रुख करना होगा ताकि जमीन को बंजर होने से बचाया जा सके। वर्ष 1960 में जमीन में ऑर्गेनिक कार्बन 2 से 2.5 प्रतिशत था, वह आज घटकर मात्र 0.5 प्रतिशत रह गया है। धरती बंजर होती जा रही है और अंधाधुंध रसायनों के प्रयोग से कैंसर और शुगर जैसी का्रेनिकल बीमारियों का विस्फोट हो रहा है। प्राकृतिक खेती से भूमि की उर्वरता बढने के साथ-साथ पानी की भी बचत होती है और स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती पर मात्र 2000 रुपये प्रति एकड़ का खर्च आता है और फसल का उत्पादन भी अधिक होता है।
इस मौके पर पूंडरी के विधायक सतपाल जाम्बा ने कहा कि किसानों को ज्यादा से ज्यादा प्राकृतिक खेती की तरफ बढ़ना चाहिए। यह सरकार का मिशन है। प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण लेने के लिए किसानों को प्रेरित किया जाए ताकि किसान प्राकृतिक खेती को पूर्णरूप से अपना सकें।